
निमाड़ी बोली की मिठास लोक गीतों की आत्मा है, ,,पिंकी राठौर,,
अखिल निमाड़ लोक परिषद द्वारा आयोजित संक्रांति उत्सव कार्यक्रम संपन्न।
खंडवा। निमाड़ी सरल,सहज और मीठी बोली है। अन्य भाषा-भाषी निमाड़ी सीखने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। मैं भी लगातार निमाड़ी सीखने के लिए प्रयासरत हूँ। यह बात अखिल निमाड लोक परिषद द्वारा आयोजित संक्रांति उत्सव के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षाविद समाजसेवी पिंकी राठौर ने कही। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि मुख्य अतिथि शर्मिष्ठा तोमर ने ग्रामीण परिवेश और निमाड़ी की परम्पराओं का उल्लेख किया,साथ ही उन्होंने घोषणा की अभिजीत वेलफेयर समिति की ओर से निमाड़ी गायन का एक बड़ा कार्यक्रम इस वर्ष आयोजित किया जायेगा। संरक्षक राजश्री शर्मा ने निमाड़ी की समृद्धि के लिए बहनों से निमाड़ी गद्य और पद्य दोनों में निरंतर लिखते रहने का आग्रह किया। आरंभ में माँ सरस्वती, माँ नर्मदा और प्रथम पूज्य गणेश की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया। अतिथियों का स्वागत डॉ भारती पाराशर एवं मंगला चौरे द्वारा किया गया। ममता मोहे,मनोरमा तिवारी,मीरा व्यास,मीनू तोमर,सुषमा डोंगरे,शिव कन्या सिसोदिया ने निमाड़ी लोकगीत गायन प्रस्तुत किया। ढोलक पर संगत मनोज जोशी ने की।समवेत में साथ वेदांत सावनेर ने दिया। अन्नपूर्णा तंवर और रुक्मणि सावनेर ने लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। सुधा सोहनी की विभिन्न कलाकृतियों का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर उमा भाटे, माया राठौर,वन्दना जोशी,रंजू पगारे,रंजना जोशी,श्वेता शाह, ज्योति डोंगरे,साधना साध,मेधा मंडलोई,प्रियंवदा सोहनी,सोना चौहान एवं अन्य गणमान्य महिलाएं उपस्थित थीं। आयोजन का संचालन राजश्री शर्मा ने किया,आभार अध्यक्ष मीरा व्यास द्वारा माना गया











